इतिहास

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नंगला  उग्रसेन का इतिहास

 


गाँव - नंगला उग्रसेन, जिला - बुलन्दशहर,राज्य- उत्तरप्रदेश :-

यहाँ के लुहाच परिवार की निकासी गाँव नाँधा, जिला चरखी दादरी, हरियाणा से लगभग 1775 ° को हुई थी।

नाँधा वासी दुलारो राम(29 वीं पीढ़ी) के तीन पुत्र थे : उग्रसेन (30 वीं पीढ़ी), होराम जोहरी

तीनों भाई पानी खेती योग्य भूमि की तलाश में एक साथ सहपरिवार पूर्व दिशा की ओर चल पड़ेयमुना नदी पार कर हापुड़ होते हुए उग्रसेन पहुँच गए

यहाँ कुछ समय के रहने के बाद दो भाई होराम जोहरी गाँव भंडोली की तरफ चले गए जबकि उग्रसेन यहीं पर रुक गया उग्रसेन के नाम से ही इस गाँव का नाम पड़ा

इस गाँव के लोगों का मुख्य पेशा खेती-बाड़ी है तथा फौज में भर्ती होना यहाँ के नौजवानों की प्रथम पसन्द है



     उग्रसेन गाँव पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बुलन्दशहर जिले की स्याना तहसील का एक मध्यम आबादी वाला गाँव है जो की जिला मुख्यालय से 40 किलो मीटर और तहसील मुख्यालय से 15



किलो मीटर दूर स्थित है।


देश की राजधानी नई दिल्ली से यह गाँव 65 किलो मीटर दक्षिण पूर्व में राष्ट्रीय राज मार्ग 24 से महज किलो मीटर पश्चिम दिशा में है। 



        गढ़ गंगा जो की हिंदुओं का पवित्र धार्मिक जगह है इसके 24 किलो मीटर दक्षिण पूर्व में है। इसके पूर्व में कुचेसर किला, पश्चिम में नली हुसैनपुर, उत्तर में कटक और दक्षिण में लुधपुरा गाँव की सीमा लगती है।



 सब गाँव से पक्की सड़क से संपर्क है। इस गाँव का कुल रकबा लगभग 2000 बीघा है जिसमें से लुहाच परिवार के पास 1500 बीघा जमीन है। जमीन समतल व उपजाऊ है। सिंचाई ट्यूबवेल के 



अलावा मध्य गंगा नहर और इसी नहर से निकले एक रजबाहा से होती है। गेहूँ और गन्ना इस गाँव की मुख्य फसलें हैं। गन्ना की सप्लाई सिम्भावली मील में की जाती है जो की गाँव से महज 16 किलो मीटर दूर स्थित है।



   लुहाच के अतिरिक्त इस गाँव में सिंघानिया, मलिक, राणा, पायल और दुलट गौत्र के लोग भी रहते हैं। जाट के आलावा अन्य जाति जैसे ब्राह्मण, जाटव, बाल्मीकि, गडरिया और लोध राजपूत भी रहते हैं। सब जाति के लोग प्रेम व सद्भावना


से रहते हैं।



इस गाँव में 5 मंदिर, 3 तालाब, 1 प्राथमिक स्कूल, 1 चौपाल, 1 आंगणबाड़ी केन्द्र, 1 पीने के पानी की टंकी और 1 गौशाला हैं।



उग्रसेन गाँव के प्रथम लुहाच पुरुष उग्रसेन लुहाच हरियाणा के चरखी दादरी जिले के नानधा गाँव से लगभग 1775 ईस्वी में आए थे। नानधा से 18 वीं शताब्दी के अन्त में दो बार बड़े विस्थापन हुए थे।



पहला विस्थापन लगभग 1775 ईस्वी में हुआ 



जिसमें नानधा गाँव की 27 वीं पीढ़ी के दुलारो राम के तीन बेटे उग्रसेन लुहाच, होराम लुहाच और जोहरी लुहाच सपरिवार एक जत्था बना कर पानी और उपजाऊ जमीन की तलास में यमुना नदी पार कर उग्रसेन पँहुच गए।



उस समय उग्रसेन गाँव की जगह कोई बस्ती नहीं थी। पहला डेरा इन तीनों भाइयों ने डाला था। कुछ समय बाद उग्रसेन को वहीं छोड़ होराम और जोहरी भंडोली आ गए। 



जोहरी यहाँ कुछ दिन रुकने के बाद और आगे गंगा नदी पार कर मुरादाबाद के पास ज्ञानपुर आकर रहने लगे।



इस प्रकार इस बस्ती का नाम उग्रसेन पड़ गया। इस लिए उग्रसेन का खेड़ा लुहाच का खेड़ा माना जाता है। आज भी इस गाँव में आबादी और जमीन के आधार पर लगभग 60% बाहुल्य लुहाच गौत्र का है।